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चोर और पुलिस की कहानी | Chor Aur Police Ki Kahani

वैसे तो अपने करों पुलिस से जुड़ी कई ज्ञानवर्धक को मनोरंजक कहानी पूरी होगी । आज हम आपको एक ऐसी ही पुलिस और कर से जुड़ी नैतिक शिक्षा पर आधारित कहानी सुनाने वाले हैं जिससे कि इस कहानी को पूरा पढ़कर आपको बहुत ही अच्छी-अच्छी शिक्षा प्राप्त होने वाली है।

अगर यह कहानी आपको अच्छी लगी है तो अपने मित्रों को जरुर शेयर करना और अपने घर के छोटे बच्चों को भी पानी से मिलने वाली इच्छा जरूर बताना ।

चोर और पुलिस की कहानी के बारे में

कहानी का शीर्षकचोर और पुलिस की कहानी
कहानी के पात्रचोर, गाँव वाले और पुलिस
विषयईमानदार जीवन
भाषा हिदी
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चोर और पुलिस की कहानी

एक सुबह की धूप में एक छोटे से गाँव के पास एक छोटा सा बस स्टैंड था। वहां कुछ लोग बस का इंतजार कर रहे थे, जबकि कुछ बच्चे खुले मैदान में खेल रहे थे। गाँव की चारों ओर एक अच्छी हवा बह रही थी और वहां का माहौल बहुत ही शांत था।

एक दिन, गाँव में एक बड़ा चोर आया। उसका नाम राजू था और वह गाँववालों के सोते वक्त उनके घरों से सामान चुराता था। राजू का हर कारनामा बड़ा होता था और गाँववाले उसके खौफ में जी रहे थे।

चोर और पुलिस की कहानी

एक दिन राजू ने सोचा कि वह गाँव में कितना दरिंदा बन गया है और उसे देखकर गाँववाले कितने डरे हुए हैं। उसने फिर एक बड़ा कारनामा करने का निर्णय किया।

रात के समय, जब सब लोग सो रहे थे, राजू ने एक सोने के घर के दरवाजे को धीरे-धीरे खोला। वह दरवाजे के अंदर चुपके से पहुँचा और सोने के घर की खोज शुरू की।

एक अन्य ओर, गाँव में एक होशियार पुलिसवाला भी था। उसका नाम अर्जुन था और वह गाँव में सुरक्षा बनाए रखने के लिए रातों में पटरोल करता था। अर्जुन ने कभी भी गाँव को छोड़ने का इरादा नहीं किया और उसने अपना कार्य ईमानदारी से किया।

राजू ने सोने के घर में से कुछ सामान चुराया और जब वह बाहर निकल रहा था, तभी अर्जुन ने उसको देख लिया। अर्जुन ने तुरंत पुलिस स्टेशन को बुलाया और राजू की पीछा करने का आदेश दिया।

राजू को देखकर अर्जुन ने धारा ४२० के तहत उसका गिरफ्तार कर लिया। राजू ने जब देखा कि उसका कारनामा सफल नहीं हुआ और वह अब सिर्फ सजा का होशियार है, तो उसने अपनी गलतियों का आभास किया।

अर्जुन ने राजू से उसकी गलती पर पछताया और उससे यह कहने का मौका मिला कि वह अपनी जिंदगी को सुधारे और ईमानदारी से जीने का प्रयास करे।

राजू को सुनकर अर्जुन ने उससे वादा किया कि वह अगर इसके बाद कभी फिर से गलती नहीं करेगा और ईमानदारी से जीने का प्रयास करेगा, तो उसे छोड़ा जाएगा।

राजू ने अपनी गलतियों का पछतावा करते हुए वादा किया कि वह कभी भी फिर से गलत रास्ते पर नहीं जाएगा। इसके बाद, अर्जुन ने उसे छोड़ दिया और राजू ने एक नई शुरुआत के लिए एक सकारात्मक कदम उठाया।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें कभी भी गलत रास्ते पर जाने की आवश्यकता नहीं है। गलतियों को सुधारना और दुरुस्त कार्रवाई करना हमें सही मार्ग पर ले आता है और एक ईमानदार जीवन बनाए रखता है।

यह कहानी हमें क्या सिखाती है?

चोर और पुलिस की कहानी से हमें ईमानदारी गलतियों से सीखना सुधार और दूसरों को मौका देना और समाज में आपसी भरोसे से संबंधित बहुत ही नीति और ज्ञानवर्धक इच्छा प्राप्त होती है ।

  1. ईमानदारी का महत्व: कहानी ने दिखाया है कि ईमानदारी से जीना और गलतियों को स्वीकार करना अहम है। राजू ने जब अपनी गलतियों को स्वीकार किया, तब ही उसे सुधारने का मार्ग मिला।
  2. अपनी गलतियों से सीखना: राजू ने अपनी गलतियों को सीधे सामना किया और इससे उसे अपने कीमती सिख मिली। हमें भी अपनी गलतियों से सीखना चाहिए और उन्हें सुधारने का प्रयास करना चाहिए।
  3. सुधार और दूसरों को मौका देना: अर्जुन ने राजू को सजा नहीं दी, बल्कि उसे एक और मौका दिया गया। इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें दूसरों को सुधारने का मौका देना चाहिए और उन्हें दूसरा मौका देना चाहिए।
  4. गलती सुधारने का साहस: राजू ने अपनी गलती सुधारने के लिए साहस दिखाया और नए मार्ग पर चलने का निर्णय किया। हमें भी अपनी गलतियों को सुधारने के लिए साहस और उत्साह दिखाना चाहिए।
  5. समाज में आपसी भरोसा: अर्जुन ने राजू को छोड़ने में विश्वास दिखाया और उसे सुधारने का मौका दिया। यह हमें दिखाता है कि हमें अपने समाज के सदस्यों में आपसी भरोसा बनाए रखना चाहिए।

इस कहानी के माध्यम से हमें यह सिखने को मिलता है कि गलतियों को स्वीकार करना, सुधार करना और दूसरों को मौका देना एक सफल और सामर्थ्यपूर्ण जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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चोर और पुलिस की कहानी से जुड़े सवाल जवाब

  1. यह कहानी किस घटना पर आधारित है?

    यह कहानी चोरों की घटना पर आधारित है ।

  2. इस कहानी से हमने क्या सिखा?

    इस कहानी की शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा ईमानदार देना चाहिए ।

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