छोटे बच्चों की कहानी | Chote Baccho ki Kahani in Hindi

छोटे बच्चों की कहानी: नमस्कार दोस्तों वैसे तो अपने छोटे बच्चों के लिए कई सारी ज्ञानवर्धक और मनोरंजन करने वाली कहानी जरूर सुनी होगी। आज हम आपको 10 ऐसी ज्ञानवर्धक कहानी की सूची और उन कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं।

जिसे पढ़कर छोटे बच्चों को ज्ञानवर्धक शिक्षा और मनोरंजन दोनों प्राप्त होगा। अगर यह हिंदी कहानी आपको अच्छी लगी होगी तो अपने मित्रों को जरुर शेयर करना।

तो चले आईए जानते हैं छोटे बच्चों की इस ज्ञानवर्धक और रोचक कहानियों के बारे में।

छोटे बच्चों की कहानी के बारे में (Chote Baccho ki Kahani in Hindi)

कहानी का शीर्षकछोटे बच्चों की कहानी
कहानी के पात्रजंगल के जानवर
विषयनैतिक शिक्षा
भाषा हिदी
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छोटे बच्चों की कहानी

बच्चों के लिए एक छोटी सी कहानी-

यहाँ हम आपके कुछ अच्छी मनोरंजक कहानी के बारे में बताने जा रहे है।

छोटे बच्चों की कहानी

1. बंदर और उल्लू की कहानी (Bandar Aur Ullu Ki Kahani)

एक जंगल में एक बंदर और एक उल्लू रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे और समय बिताने में बहुत मजे करते थे। बंदर बहुत चालाक और हास्यास्पद था, वह हमेशा उल्लू के साथ मस्ती करता और मजाक उड़ाता रहता।

एक दिन, बंदर और उल्लू ने मिलकर एक साथ यात्रा करने का फैसला किया। वे दोनों अपनी यात्रा की तैयारियों में लग गए और सफलता की कश्ती पार करते हुए जंगल के गहरे भाग में चले गए।

यात्रा के दौरान, उल्लू ने बंदर को यात्रा के लिए एक मुश्किल स्थान दिखाया। वहां एक बड़ा पेड़ था, जिसकी ऊँचाई बंदर के लिए पहुंचना मुश्किल थी।

उल्लू बंदर से बोला, “मेरे दोस्त, आप इस पेड़ पर कैसे चढ़ोगे? इतनी ऊँचाई को पार करना आसान नहीं है।”

बंदर ध्यान से सोचा और फिर बोला, “तुम चिंता न करो, मेरे पास एक तरीका है। मैं तुम्हें उस ऊँचाई पर ले जाने का एक अद्भुत योजना बना सकता हूँ।”

बंदर ने एक लंबा डंगर लगाया और उसके ऊपर एक और और बड़े डंगर को रखा। वे यह डंगर चढ़कर पेड़ के शाखाओं तक पहुंच गए। बंदर ने उल्लू को भी ऊपर बुलाया और उन्होंने साथ में एक अच्छा समय बिताया।

बाद में, जब दोस्त वापस आने का समय हुआ, उल्लू बंदर से पूछा, “तुम्हारे पास इतनी बुद्धिमानी से उस ऊँचाई तक पहुंचने की योजना कैसे बन गई?”

बंदर ने मुस्कराते हुए कहा, “दोस्त, बुद्धिमानी है तो सभी से सिखते रहना चाहिए। मैंने तुम्हारे विचार सुने और उसे अपने अनुसार समझाने का प्रयास किया। हम सभी एक दूसरे से कुछ न कुछ सीख सकते हैं, और यह हमें और भी अधिक बुद्धिमान बनाता है।”

उल्लू बहुत खुश हो गया और उसने बंदर को धन्यवाद दिया। दोनों वापस अपने घर की तरफ चले गए, और उनकी दोस्ती और समझदारी का नया संबंध मजबूत हुआ।

सिख: यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपने दोस्तों से सीखने और उनसे अधिक समझदार बनने की कला सीखनी चाहिए। हम दूसरों की समझ, योजना और विचारों से बढ़कर हो सकते हैं और इससे हमारी दोस्ती और संबंध और भी अधिक मजबूत बनते हैं। इसलिए, हमें हमेशा समझदार रहने का प्रयास करना चाहिए और अपने दोस्तों से सीखने को खोला रखना चाहिए।

2. मेंढकों की दौड़ (Mendak Ki Daud Ki Kahaniyan)

मेंढकों की दौड़ एक रोमांचकारी और मजेदार कहानी हो सकती है। नीचे एक ऐसी कहानी पेश करते हैं:

मेंढकों की दौड़ की कहानी

एक छोटे से गाँव में बहुत सारे मेंढक रहते थे। वे गाँव के कुएं के आसपास बसे हुए थे और रोज़ाना वहां से पानी की बूँदें जीवनाधार बनाते थे। एक दिन, उनमें से कुछ मेंढक अपने बड़े और मजेदार दोस्त दावत देने का प्लान बनाया।

उन्होंने दौड़ का मैदान तैयार किया और सभी मेंढक दावत में आमंत्रित किए। दावत के दिन सभी मेंढक उन्हें मैदान में जमा हो गए। एक छोटे से झील के किनारे वे सभी एक साथ दौड़ने के लिए तैयार थे।

दौड़ का बजार ताजगी और उत्साह से भरा हुआ था। सभी मेंढक एक साथ लाइन में खड़े हो गए। एक, दो, तीन… शुरुआत आगे निकल गए। सभी जोर जोर से दौड़ रहे थे। लगभग हर मेंढ़क ने दौड़ में भाग लिया, लेकिन कुछ मेंढक पीछे रह गए।

उनमें से एक बड़ा सा मेंढक दौड़ के मध्य में पहुँच गया और अचानक उसका पैर एक पत्थर के ठोकर से टकरा गया। वह थोड़ा तेज़ी से दौड़ने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसका पैर ठेस हो गया था और वह दौड़ के मैदान से बाहर हो गया।

अन्य मेंढक देखकर दुखी हो गए और उसे बहुत सारी मदद करने की कोशिश की। वे उसे दौड़ने के लिए प्रोत्साहित करने लगे। उन्होंने कहा, “तुम यहाँ खड़े हो जाओ, हम तुम्हें आगे धक्का देंगे।”

सभी मेंढक मिलकर उसे धक्का देने लगे और उसे दौड़ने में सहायता की। अंत में, उसमें जब ताक़त और उत्साह दोनों आ गए, वह भी अब जोरदार रफ्तार से दौड़ने लगा।

आखिरकार, उस बड़े से मेंढक ने पहले स्थान पाया। सभी मेंढक उसके साथ बहुत खुश थे क्योंकि उसकी जीत उनके सामर्थ्य और साहस का प्रतीक थी। वे सभी मिलकर एक बड़े पर्व पर जीत का जश्न मनाया।

सिख: यह कहानी हमें सिखाती है कि समर्थ होने के लिए सहायता और समर्थन की आवश्यकता होती है। जिंदगी में कई बार हमें समस्याओं का सामना करना पड़ता है, और उन्हें समाधान करने के लिए हमें साथी और दोस्तों के समर्थन की जरूरत होती है। हमें अपने प्रियजनों की मदद करनी चाहिए और उन्हें उनके लक्ष्य तक पहुंचने में सहायता करनी चाहिए। इससे हमारे संबंध मजबूत होते हैं और हमारे जीवन में सफलता की उच्चाईयां मिलती हैं।

3. नीला सियार की कहानी (Neela Siyar Ki Kahani)

नीला सियार की कहानी (The Blue Jackal Story) भारतीय जनपद की प्रसिद्ध कहानियों में से एक है। यह कहानी पंचतंत्र की एक शिक्षाप्रद और मनोरंजक कहानी है। नीचे एक संक्षेपित रूप से यह कहानी पेश की गई है:

नीला सियार की कहानी

एक जंगल में एक नीले रंग का सियार रहता था। वह अपने नीले रंग के कारण बहुत विशाल और भयानक दिखता था। एक दिन, वह अपने रंग के कारण अपनी भीड़ से अलग हो गया और अकेला चला जा रहा था।

चलते-चलते, वह एक गांव के पास पहुंच गया। गांव के लोग देखकर बहुत घबरा गए। वे सोचने लगे कि यह नया और भयानक सियार है, जो उन्हें क्षति पहुंचा सकता है। वे भयभीत हो गए और उससे बचने के लिए उसे भागा देने का प्रयास करने लगे।

दौड़ते-दौड़ते, नीला सियार वाहन के एक छोटे से पुराने भट्टी में छिप गया, जो गांव के आस-पास थी। लोग जिद हो गए और उसे ढूंढने की कोशिश करने लगे।

इस दौरान, भट्टी के अंदर से नीला सियार एक आवाज सुना, जो कुछ अजीब लगी। उसे बच्चे रोते हुए सुनाई दी।

नीला सियार बच्चे की माँ के रूप में आगे बढ़ा और बच्चे के साथ प्यार से खेलने लगा। भट्टी में रहने वाले लोग भी यह स्थिति देखकर हैरान रह गए। वे सोचने लगे कि यह नया सियार इतना नरम और प्यारा कैसे हो सकता है?

दौड़ते दौड़ते, उस बच्चे की माँ के रूप में नीला सियार उस गांव से बाहर चला गया, जहां से वह आया था। लोग उसे निराश होकर वापस अपने घर लौट गए।

सिख: नीला सियार की कहानी हमें यह सिखाती है कि हमारी दिखावटी रूप से आपसी संबंधों को न केवल जज्बाती रूप से समझना चाहिए, बल्कि इसमें संवेदनशीलता और प्रेम का भाव भी होना चाहिए। हमें अपने दर्शकों के भयानक रूप से व्यवहार करने की जगह उन्हें समर्थन और प्रेम के साथ संबोधित करना चाहिए। यह हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण सामर्थ्य है।

4. बंदर और डॉल्फिन की कहानी (Bandar Aur Dolohin Ki Kahani)

एक समय की बात है, एक समुद्र तट पर एक हरियाली वाला जंगल था, जिसमें कई प्राणियों का बसेरा था। वहां एक बंदर रहता था, जो बहुत ही खुशनुमा, मिलजुल करने वाला और मिस्चीवस था। उसे समुद्री प्राणियों के साथ खेलना बहुत पसंद था। विशेष तौर पर, उसके सबसे अच्छे मित्र हरे-भरे जंगल के बगीचे में रहने वाली एक डॉल्फिन थी।

बंदर और डॉल्फिन दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और साथ में बहुत मस्ती करते थे। वे जलप्रपातों में कूदते, पानी में खेलते और एक-दूसरे के साथ मस्ती करते थे। दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी, जो दूसरों को भी प्रेरित करती थी।

एक दिन, बंदर और डॉल्फिन जलप्रपात के पास खेल रहे थे। वे इतने उत्साहित थे कि वे अपने खुद के चालान के बारे में ध्यान नहीं रख रहे थे। बंदर बिना सोचे समझे एक ऊँचे चट्टान से कूद गया, जो थोड़ी दूर पर समुद्र में थी। उसके प्रयास के बावजूद, उसे पानी के बीच बंद होना पड़ा और वह पानी में डूबने लगा।

डॉल्फिन ने जल्दी समझ लिया कि उसका मित्र परेशान हो रहा है। वह तुरंत बंदर की मदद करने के लिए पहुंची। उसने बंदर को अपनी मुखौटा बनायी ओर कहा, “जल्दी से मेरी मुखौटा को पकड़ और मुझे धक्का दो। मैं तुम्हें समुद्री चट्टान के पास पहुंचा दूँगी और वहां से तुम अपने रास्ते चले जाओगे।”

बंदर ने डॉल्फिन की मदद से जलप्रपात के पास पहुंच गया और वहां से आसानी से बाहर आ गया। उसने डॉल्फिन को धन्यवाद दिया और उनकी मदद के लिए आभार व्यक्त किया। बंदर और डॉल्फिन की दोस्ती और सहायता एक अद्भुत उदाहरण थे कि सभी प्राणियों के बीच मित्रता का महत्व क्या है।

सिख: यह कहानी हमें सिखाती है कि मित्रता और सहायता हर इंसान के जीवन में महत्वपूर्ण हैं। हमें अपने साथियों के साथ खुशियों और दुखों का सामंजस्य रखना चाहिए और सभी की मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए। एक-दूसरे का साथ देने से हमारा जीवन अधिक समृद्ध होता है और हमें अधिक संतुष्टि मिलती है।

5. दो मछलियों और एक मेंढक की कहानी (Do Machhliyon or Ek Ki Kahani)

एक बार एक सुंदर झील में दो मछलियां रहती थीं। इन दो मछलियों का नाम गुलाबी और नीली था। वे बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेशा साथ मिलकर खेलते रहते थे। झील का पानी उन्हें खुशियों से भर देता था। एक बार गर्मियों के दिनों में, झील में पानी की मात्रा कम होने लगी और मछलियों को चिंता होने लगी।

गुलाबी बहुत विचलित हो गई क्योंकि वह सोचती थी कि झील का पानी खत्म हो जाएगा और उसे भूखा रहना पड़ेगा। वह नीली के पास गई और बोली, “नीली, हमें जल्दी से झील के बाहर जाना चाहिए। पानी खत्म होने वाला है और हमें खाने को कुछ नहीं मिलेगा।”

नीली भी चिंतित थी, लेकिन उसने गुलाबी को समझाया, “गुलाबी, हमें जल्दी में कुछ करने की जरूरत नहीं है। हमें धैर्य से इंतज़ार करना चाहिए और देखना चाहिए कि क्या होता है।”

गुलाबी और नीली ने तब एक मेढ़क को देखा, जो उनसे बहुत छोटा था। वे मेढ़क के पास गए और उससे जानकारी पूछने लगे। मेढ़क ने बताया कि वह एक ज्योतिषी है और वह देख सकता है कि भविष्य में क्या होने वाला है।

गुलाबी और नीली ने मेढ़क से पूछा, “कृपया बताएं, झील का पानी कब खत्म होगा? हमें खाने को कुछ नहीं मिलेगा यदि पानी खत्म हो जाएगा।”

मेढ़क ने हँसते हुए कहा, “तुम्हें इतनी चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। झील का पानी खत्म नहीं होगा। वास्तव में, इसमें बहुत सारा पानी है जो तुम्हें लंबे समय तक भोजन देगा।”

गुलाबी और नीली ने हृदय से भरकर धन्यवाद दिया और उन्होंने मेढ़क के कहने पर झील में खेलना शुरू कर दिया। उन्होंने देखा कि झील में पानी की मात्रा बदलती रहती है और वह सदैव पूरी रहती है।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि हमें धैर्य से इंतज़ार करना चाहिए और विश्वास करना चाहिए कि जीवन हमें सदैव जो चाहिए, वह हमें देगा।

6. घमंडी बाघ और लकड़हारा की कहानी (Ghamandi Bagh or Lakadhara Ki Kahani)

एक जंगल में एक भयानक और घमंडी बाघ रहता था। वह बाघ अपनी शक्ति और ताक़त पर बहुत गर्व करता था और उसे यह मानने में खुशी होती थी कि वह जंगल का राजा है। वह हर जानवर से ऊंचा मानता था और बहुत सारे दिनों तक अपनी शक्ति और दुर्बलता पर चर्चा करता रहता था।

इस जंगल में एक छोटी सी लकड़हारा भी रहती थी। वह छोटी और कमजोर थी, लेकिन उसके पास बड़ा दिल था। वह हमेशा अपने दोस्तों के साथ प्यार से रहती थी और कभी भी किसी को ठेस नहीं पहुंचाने का प्रयास करती थी।

एक दिन, बाघ अपनी घमंड से भरी हुई मुड़ी हुई राह पर चल रहा था। उसे देखकर लकड़हारा ने भी उसके पास जाकर नम्रता से बोला, “भयानक बाघ जी, नमस्कार। कृपया अपने भयानक स्वभाव को छोड़ दें और हम सब के साथ खेलें।”

बाघ ने लकड़हारा को ताक़त से देखा और उसे तुच्छ समझकर हँसते हुए कहा, “तू कौन है? तू मेरे स्तर का नहीं है, मेरे साथ खेलने के लिए अपनी असली ताक़त दिखा।”

लकड़हारा ने शांति से उसे जवाब दिया, “भयानक बाघ जी, देखिए, हम सब जंगल के हिस्से हैं और हम सभी को मिलकर रहना चाहिए। हमारे पास न तो आपकी ताक़त है और न ही आपकी शक्ति, लेकिन हमारे पास एक दूसरे को समझने की ताक़त है और यही हमें एक-दूसरे के साथ मिलजुलकर रहने के लिए काफी है।”

बाघ ने लकड़हारा के शब्दों को लापरवाही से उड़ा दिया और उसने उसे चुभते हुए कहा, “तू और तेरे समान छोटे जीव कभी मेरे साथ बराबर नहीं हो सकते हैं।” इसके बाद बाघ छोड़कर चला गया और लकड़हारा के आंसू निकल आए।

दिन बितते गए और एक दिन, जंगल में आग लग गई। आग की लपटों से भयानक बाघ घायल हो गया और उसकी रोने की आवाज़ सभी को सुनाई दी। जंगल के सभी जानवर आपस में मिलकर बाघ को बचाने के लिए प्रयास करने लगे।

लकड़हारा ने भी अपनी छोटी सी शक्ति का इस्तेमाल करके उसे जल्दी से एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने में मदद की। उसने उसका साथ नहीं छोड़ा और बाघ को एक सुरक्षित जगह तक पहुंचाया।

आग बुझ जाने के बाद, बाघ लकड़हारा को धन्यवाद देने पहुंचा। उसने कहा, “तुमने मुझे जो बचाया है, वह तो मैं अकेला नहीं कर सकता था। तुम्हारी छोटी सी ताक़त ने मुझे बचा लिया। मैंने तुम्हारी असली ताक़त को समझा नहीं, और तुम्हारे बड़े दिल को भी नहीं।”

बाघ ने उस दिन देखा कि छोटे और कमजोर होने से किसी की महत्वपूर्ण भूमिका नहीं खत्म हो जाती है और हर एक का अपना महत्व होता है। उसने अपने घमंड को छोड़ दिया और उसके बाद से वह सभी के साथ दयालु और मित्रभावी रहा। जंगल के सभी जानवर उसे अपना दोस्त मानते थे और वह सभी के साथ खुश रहता था।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि घमंड से दूर रहना और सभी के साथ मिलजुलकर रहना अच्छा होता है। छोटे-मोटे जीव भी ज़रूरी होते हैं और हर एक की अपनी अहमियत होती है।

7. सूअर और भेड़ की कहानी (Suar or Bhed Ki Kahani in Hindi)

एक गांव में एक सूअर और भेड़ एक साथ रहते थे। वे दोनों अच्छे दोस्त थे और हर दिन साथ मिलकर खेलते रहते थे। उनके बीच में एक गहरी दोस्ती थी जो किसी से नहीं टूटती थी।

एक दिन, सूअर और भेड़ ने गांव के बाहर एक जंगल में एक साथ घूमने का फैसला किया। जंगल में घूमते वक्त, वे बहुत सारे जानवरों से मिले। वे सभी जानवर खुश और मित्रभावी थे और सूअर और भेड़ को अपना स्नेही बना लिया।

जंगल में घूमते वक्त, उन्हें एक गहरे नदी पार करने की जरूरत पड़ी। सूअर और भेड़ ने सोचा कि यह नदी पार करना काफी मुश्किल होगा। लेकिन वे डरने वाले नहीं थे। उन्होंने मिलकर पूरी कोशिश की और एक साथ मिलकर नदी को पार कर लिया। जब वे नदी के दूसरे किनारे पहुंचे, तो उन्हें एक खास सीख मिली।

सूअर और भेड़ ने देखा कि जब वे साथ मिलकर मिलजुलकर काम करते हैं, तो उन्हें कोई भी मुश्किल नहीं थाम सकती। वे साथ मिलकर अपने लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं और हर कठिनाई को आसानी से पार कर सकते हैं।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि साथ मिलकर काम करने से हर मुश्किल को आसानी से पार किया जा सकता है। अलग-अलग शक्तियों का साथ मिलकर एक-दूसरे के सहायता से हम जीवन के कठिन परिस्थितियों से आसानी से निपट सकते हैं।

8. कंजूस और उसका सोना (Kanjoos Aur Unka Sona Ki Kahani)

एक गांव में एक बहुत ही कंजूस व्यक्ति रहता था। उसका नाम रामू था। वह हर चीज़ में बहुत कंजूस था, चाहे वह खाने-पीने की चीज़े हों, कपड़े या फिर सामान्य रोजमर्रा की चीज़े। उसे अपने सोने से भी इतना प्यार था कि वह उसे कभी खर्च नहीं करना चाहता था। वह सोने के सभी सिक्के और आभूषण अपने पास रखकर समझदारी की खान में छिपा देता था।

एक दिन, एक विचित्र विशेषज्ञ गांव आया। उसका नाम विक्रम था। वह विचारशील और बुद्धिमान व्यक्ति था। विक्रम ने देखा कि गांव में लोग खुशहाल और समृद्ध हैं, लेकिन रामू का दृश्य अलग था। उसे इसका कारण समझने का उत्साह हुआ।

विक्रम ने रामू को अपनी सोने की विशेषता दिखाई और कहा, “यह सोना आपके लिए बहुत खास है। इसका इतना विशेषता से ख्याल रखने से यह और भी अमूल्य हो जाएगा।”

रामू की आंखों में चमक आई और उसने विक्रम से पूछा, “क्या आप इसे और भी बेहतर बना सकते हैं?”

विक्रम ने हँसते हुए कहा, “जी हाँ, मैं इसे और भी बेहतर बना सकता हूँ। लेकिन इसके लिए आपको मेरी एक शर्त माननी होगी।”

रामू ने तत्काल हाँ कह दिया, “जी हाँ, शर्त बोलिए।”

विक्रम ने कहा, “आपको इस सोने को गांव के दूसरे सभी लोगों के साथ बांट देनी होगी।”

रामू का चेहरा उदास हो गया। उसे लगा कि इस तरह सोने को दूसरों के साथ बांट देना अपना खो देना है। लेकिन वह उस सोने की और विक्रम की आंखों में झलकती चमक देखकर अंततः राजी हो गया।

रामू ने सोने को गांव के लोगों के साथ बांट दिया। उसके आश्चर्यजनक बातचीत ने उसके दिल को छू लिया। वह देखा कि लोग बहुत खुश हुए और धन्यवाद देने लगे। उनके चेहरे पर खुशियाँ खिल गई।

विक्रम ने मुस्कराते हुए कहा, “आपने एक बहुत अच्छा काम किया है। सोने को दूसरों के साथ बांटकर आपका दिल भी खुश हुआ और अब आपके पास न सिर्फ एक सोने का भण्डार है, बल्कि आपके पास अच्छी दोस्ती और खुशियाँ का भण्डार है। यह सोना आपके लिए और भी अमूल्य हो गया है।”

रामू ने अपने अंदर की ख़ुशी का एहसास किया और उसने विक्रम को धन्यवाद दिया। उसका मन खुशी से भर गया और वह उस दिन से एक नए और उदार इंसान बन गया। उसकी ख़ुशियाँ और दोस्ती ने उसे वास्तविक सोने से भी अधिक अमूल्य बना दिया।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि धन और संपत्ति अगर अच्छी तरीके से उपयोग नहीं की जाती है, तो वे अर्थहीन हो जाती हैं। जब हम अपने संपत्ति को दूसरों के साथ बाँटते हैं, तो हमारी खुशियों में भी बहुत वृद्धि होती है। दानशीलता और साझा करने से हम अपने आसपास के लोगों के साथ अच्छी दोस्ती और खुशियों का भण्डार बना सकते हैं।

9. चमचमाती तारे की कहानी (Chanchamti Taro ki Kahani)

एक बार एक छोटी सी तारा थी, जिसका नाम था चमचमा। वह अपनी छोटी सी रौशनी के साथ आकाश में उड़ रही थी। चमचमा बहुत खुश थी क्योंकि उसके पास बहुत सारे मित्र थे – चमकीली बिजली, बड़े और छोटे तारे सब उसके दोस्त थे।

एक दिन, चमचमा को देखा कि एक छोटा सा तारा अकेला बैठा हुआ था और रो रहा था। चमचमा उसके पास गई और पूछा, “हे छोटे सा तारा, तुम रो क्यों रहे हो?”

छोटा सा तारा उत्साह से बोला, “मैं ताकतवर और चमकदार होना चाहता हूँ, लेकिन मुझमें इतनी रौशनी नहीं है जितनी बाकी तारों में है। मैं भी सब की तरह आकाश में खूबसूरती बिखरना चाहता हूँ।”

चमचमा बड़ी मेहनत से बोली, “तुम बिल्कुल साहसी और खास हो, अपने तरीके से। तुम्हारी छोटी सी रौशनी भी बहुत महत्वपूर्ण है। तुम देखो, जब रात को आकाश अंधकार से भर जाता है, तो तुम्हारी रौशनी सभी को प्रसन्न करती है। तुम अपने तरीके से खास हो, और तुम्हारी रौशनी भी। अपनी खुबसूरती और ताकत को कभी ना छुपाओ, बल्कि हमेशा उसे दिखाओ।”

छोटे सा तारा ने धन्यवाद दिया और खुशी से चमक उठा। वह खुश था क्योंकि उसे अब अपनी खासियत से गर्व होने लगा था। चमचमा ने भी खुशी से उसके साथ चमकना शुरू किया और उन्होंने एक साथ आकाश में सबको रौंगते खड़ी कर दी।

सिख: यह कहानी बच्चों को यह सिखाती है कि हम सभी अपने तरीके से खास हैं और हमारी एक भी खासियत हमें अलग बनाती है। हमें खुद को प्रसन्नता से स्वीकारना चाहिए और अपने सभी गुणों को समझने और समर्थन करने की कला सीखनी चाहिए। हमें अपने स्वयं के स्तर पर खुश रहना चाहिए और दूसरों की खूबसूरती को भी समझने का प्रयास करना चाहिए। हमारे खासियत ही हमें खास बनाती हैं और हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए।

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यह कहानी हमें क्या सिखाती है?

इन सभी कहानियों से हमें कई महत्वपूर्ण शिक्षाएं मिलती हैं। यहां कुछ मुख्य शिक्षाएं हैं:

  1. दयालुता और मदद करने की महत्वा (दो मछलियों और एक मेंढक की कहानी): इस कहानी से हमें यह सिखाया जाता है कि हमें दूसरों की मदद करने में उत्सुकता से जुटना चाहिए और दयालु बनकर दूसरों की सहायता करना एक बड़ा गुण है।
  2. अपने घमंड से बचने की आवश्यकता (घमंडी बाघ और लकड़हारा की कहानी): इस कहानी से हमें यह सिखाया जाता है कि घमंड से दूर रहना और दूसरों के साथ विनम्र और सहयोगी रहना अधिक सफलता का मार्ग होता है।
  3. साझा करने की महत्वा (सूअर और भेड़ की कहानी): इस कहानी से हमें यह सिखाया जाता है कि अपने संपत्ति, समय, और साझा करने से हम और अधिक खुश और समृद्ध हो सकते हैं।
  4. सपनों को पूरा करने की अहमियत (चमचमाती तारे की कहानी): इस कहानी से हमें यह सिखाया जाता है कि छोटी सी इच्छा और संकल्प से हम बड़े चमत्कार को हकीकत में बदल सकते हैं। हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए सही निर्णय और सक्रिय रूप से काम करने की ज़रूरत होती है।

यह सभी कहानियां जीवन के मूल्यों, धरोहरों, और दूसरों के साथ सहयोग की महत्वपूर्ण शिक्षाएं बताती हैं। ये कहानियां हमें समझाती हैं कि विनम्रता, मदद, और साझा करना हमारे जीवन में सफलता और संतुष्टि की कुंजी हैं।

छोटे बच्चों की कहानी से जुड़े सवाल जवाब

  1. इस कहानी से हमने क्या सिखा?

    यह सभी कहानियां जीवन के मूल्यों, धरोहरों, और दूसरों के साथ सहयोग की महत्वपूर्ण शिक्षाएं बताती हैं।

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हेलो दोस्तों! में Mayur Arya [hindineer.com] का Author & Founder हूँ। में Computer Science (C.s) से ग्रेजुएट हूँ। मुझे latest Topic (हिन्दी मे) के बारे में जानकारी देना अच्छा लगता है। और में Blogging क्षेत्र में वर्ष 2018 से हूँ। इस ब्लॉग के माध्यम से आप सभी का ज्ञान का स्तर को बढाना यही मेरा उद्देश्य है ।

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