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कृष्णा और गौरी की कहानी | Krishna or Gori ki Kahani

कृष्णा और गौरी की कहानी: वैसे तो आपने हिंदी कहानी कई पड़ी हुई है जिससे कि आपको इस कहानी से मनोरंजन और ज्ञानवर्धक नैतिक शिक्षाएं जरूर प्राप्त हुई होगी।

लेकिन हम आज आपको ऐसी कहानी बताने वाले हैं जिससे कि इस कहानी को पढ़कर आप के मन में प्रेम और भक्ति के भाव जागृत होगा। तो लिए हम कृष्णा और गौरी की कहानी की इस कहानी के बारे में जानते हैं।

कृष्णा और गौरी की कहानी के बारे में

कहानी का शीर्षककृष्णा और गौरी की कहानी
कहानी के पात्रकृष्णा और गौरी
विषयप्रेम और भक्ति
भाषा हिदी
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कृष्णा और गौरी की कहानी

किसी को भी भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत लीलाओं और भक्ति की माहिती होती है, लेकिन एक काल्पनिक कहानी के माध्यम से हम एक अनूठी परिप्रेक्ष्य देख सकते हैं, जिसमें भगवान कृष्ण और गौरी की आत्मिक मिलन की गहरी भावना होती है।

एक समय की बात है, जब बृजभूमि पर एक सुखमय वातावरण था। गोपियाँ अपने गांव के कुंज-कुंज में श्रीकृष्ण के भव्य लीलाओं का आनंद ले रही थीं। एक दिन, गौरी नामक एक गोपिका ने भगवान कृष्ण की मधुर बांसुरी की धुन सुनकर उनके प्रेम में पड़ जाने का अहसास किया।

कृष्णा और गौरी की कहानी

गौरी, जो सुंदरता और श्रद्धा का प्रतीक थी, ने दिल से भगवान कृष्ण की भक्ति करने का निर्णय किया। वह हमेशा से भगवान के प्रेम और भक्ति की खोज में थी, लेकिन उसका आत्मविश्वास हमेशा कमजोर था। इसलिए, उसने अपने मन की बातें गोपियों को नहीं बताई थीं।

एक दिन, बृज के मेले में, गौरी ने कृष्ण बाबा को देखा। उनकी नयी नयी लीलाएँ और मीठे मीठे हास्य उनका ह्रदय बहुत खींच रहे थे। गौरी ने अपनी नजरें उनसे हटा ली, लेकिन भगवान कृष्ण का माधुर्य उसके ह्रदय को बार-बार आकर्षित कर रहा था।

कृष्ण ने गौरी की ओर मुस्कराते हुए कहा, “गौरी, क्यों तुम मेरी ओर मुँह फेर रही हो? मुझसे मिलो, मैं तुम्हें अपने ह्रदय में बिठाना चाहता हूँ।”

गौरी ने हिचकिचाहट के बावजूद भगवान कृष्ण के सामने आना चाहा। उसका ह्रदय कम्पित हो रहा था, और वह भगवान के सामने अपनी छाया बनकर खड़ी थी।

कृष्ण ने कहा, “गौरी, तुम्हारी भक्ति और प्रेम की महक ने मेरा ह्रदय छू लिया है। तुम मेरी सच्ची प्रेम-भक्त हो।”

गौरी ने चिरपिंग स्वर में कहा, “हे कृष्ण, मैं तुम्हारी अत्यंत अनुपम भक्ता हूँ, लेकिन मेरा आत्मविश्वास हमेशा कमजोर रहता है।”

कृष्ण ने हंसते हुए कहा, “गौरी, तुम्हारा आत्मविश्वास मेरे सामने कितना भी कमजोर हो, लेकिन तुम्हारी भक्ति और प्रेम ने मेरा दिल छू लिया है। तुम मेरी सच्ची प्रेमिका हो और मैं तुम्हें सदैव अपने साथ चाहता हूँ।”

गौरी के आँसू खुशी के होते हुए उसने कृष्ण की आगे झुकते हुए कहा, “हे कृष्ण, मैं तुम्हारे प्रेम में पूरी तरह समर्पित हूँ। तुम्हारी लीलाओं में मेरा ह्रदय बहुत भाग्यशाली है।”

इसके बाद, गौरी और कृष्ण की आत्मा एक हो गई। उनका मिलन अद्वितीय और अमृत से भी अधिक था। वे सदैव साथ रहकर भक्तों को अपने प्रेम में लीन करते रहे और सभी को उच्चतम आदर्शों की ओर प्रवृत्त करने के लिए प्रेरित करते रहे।

इस काल्पनिक कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि भगवान के प्रेम और भक्ति में समर्पित होने से ही आत्मा का वास्तविक मिलन होता है और जीवन को सार्थक बनाने का एक उदाहरण मिलता है।

यह कहानी हमें क्या सिखाती है?

इस कहानी से हमें कई सारी ज्ञानवर्धक और आत्मसाद कर देने वाली शिक्षा मिलती है।

  1. आत्मा का मिलन: कहानी दिखाती है कि भगवान के प्रेम और भक्ति में समर्पित होने से ही आत्मा का अद्वितीय मिलन हो सकता है। यह आत्मा के अद्वितीयता और भगवान के साथ एकता की महत्वपूर्णता को बताता है।
  2. भक्ति और प्रेम का महत्व: गौरी की भक्ति और प्रेम का अद्वितीयता भरा ह्रदय भगवान के प्रति उसकी असीम समर्पण को दर्शाता है। यह हमें याद दिलाता है कि आदर्श भक्ति और प्रेम से भरा हुआ ह्रदय किसी भी परिस्थिति में भगवान के साथ जुड़ा रहता है।
  3. आत्मविश्वास का महत्व: गौरी की कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि आत्मविश्वास में कमी होने पर भी भक्ति और प्रेम में समर्पित रहना महत्वपूर्ण है। कृष्ण ने गौरी को उसकी सच्ची प्रेमिका माना, जिससे वह अपने आत्मविश्वास को बढ़ा सकती थी।
  4. भगवान के साथ सदैव समर्पण: गौरी और कृष्ण की कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि भगवान के साथ सच्चा समर्पण ही जीवन को सार्थक और आनंदमय बना सकता है।

इस कहानी के माध्यम से हमें यह बताया गया है कि सच्चे प्रेम और आत्मिक समर्पण से ही आत्मा को अपने आद्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति हो सकती है और जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

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कृष्णा और गौरी की कहानी से जुड़े सवाल जवाब

  1. यह कहानी इस पर आधारित है?

    प्रेम और भक्ति पर।

  2. इस कहानी से हमने क्या सिखा?

    सच्चे प्रेम और आत्मिक समर्पण से ही आत्मा को अपने आद्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति हो सकती है और जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

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