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नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ | Naitik Shiksha ki Kahani in Hindi

नैतिक शिक्षा यह ऐसी शिक्षा है जिसे हर मनुष्य को दी जानी चाहिए। यह शिक्षा मनुष्य के जीवन में उसके बौद्धिक विकास के लिए एक मुख्य भूमिका निभाती है। वैसे तो अपने नैतिक शिक्षाप्रद कई कहानियां सुनी होगी जिससे कि आपको इस कहानी से ज्ञान आवश्यक मिला होगा।

लेकिन हम आपको आज 10 से अधिक अच्छी और रोचक नैतिक शिक्षा (Naitik Shiksha ki Kahani) की कहानी बताने वाले हैं जिसे पढ़कर आपको आपके जीवन में कई प्रकार के लाभदायक शिक्षा मिलने वाली है।

तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़े जिससे कि आपको इस कहानियों से शिक्षा मिल पाए। और यह कहानी आपको अच्छी लगी है तो अपने मित्रों को भी जरूर शेयर करना। तो चलिए लिए जानते हैं इन नैतिक शिक्षा से जुड़ी कहानियों के बारे में।

नैतिक शिक्षाप्रद कहानी के बारे में

कहानी का शीर्षकनैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ
कहानी के पात्रविभिन्न पात्र
विषयनैतिक शिक्षा
भाषा हिदी
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नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ (Naitik Shiksha ki Kahani)


नैतिक शिक्षा प्रद  हिंदी कहानी बच्चों और युवाओं को जीवन में सही और गलत के बीच अच्छे मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन करने का माध्यम होती हैं। ये कहानियाँ अच्छे मूल्यों, नैतिकता, और सही निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं। यहां कुछ नैतिक शिक्षा प्रद कहानियाँ हैं:

नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ
  1. ईमानदारी का महत्व: एक बड़ा सफल व्यापारी किसान से एक मोटे बिल का भुगतान करने के बाद बिल की गलती से कम देता है। किसान बिल की गलती का पता लगाता है, लेकिन वह यह नहीं बताता है और पूरे बिल की राशि वापस कर देता है। इस कहानी से यह सिखाया जा सकता है कि ईमानदारी का महत्व होता है।
  2. सहानुभूति का संदेश: एक किसान छोटे से गाँव में रहता है और उसका एक ही बेटा होता है। वह किसान और उसके बेटे के बीच अच्छे संबंध बनाता है और उसे सहानुभूति की महत्वपूर्ण बात सिखाता है।
  3. सच्चे मित्र का महत्व: दो बचपन के दोस्त होते हैं, जो कभी-कभी झगड़ते हैं, लेकिन वे हमेशा एक-दूसरे के साथ होते हैं और सच्चे मित्र होते हैं। इस कहानी से दोस्ती और विश्वास का महत्व सिखाया जा सकता है।
  4. सेवा का महत्व: एक बच्चे ने एक पुराने वृद्ध आदमी की मदद की और उसके साथ समय बिताने का संकल्प बनाया। इससे सेवा करने का महत्व और समय बिताने का महत्व सीखा जा सकता है।
  5. संयम की महत्व: एक कहानी में एक बच्चा चॉकलेट खाने का मन बनाता है, लेकिन वह संयम दिखाता है और खुशियों के लिए अपनी माँ को चॉकलेट देता है। इससे संयम की महत्व की बात सिखाई जा सकती है।

ये कहानियाँ नैतिक मूल्यों को समझाने और अच्छे नैतिकता की बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।

1) सच्ची शिक्षा की कहानी

यह कहानी एक समय की है, जब एक छोटे से गाँव में एक उदार और ज्ञानी शिक्षक रहता था, जिसका नाम रामु था। वह अपने गाँव के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध थे।

रामु के पास केवल एक छोटी सी शिक्षा यंत्र ही था, लेकिन वह इसका उपयोग बड़ी खुशी और संवेदनशीलता से करते थे। उनकी शिक्षा का माध्यम खेतों में खेती करते जमींदारों के बच्चे से लेकर गरीब लोगों के बच्चों तक पहुँचता था।

एक दिन, एक गरीब परिवार का छोटा सा लड़का, नीलू, रामु के पास आया। नीलू की परिवार में पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन उसमें बड़ी उम्मीद और इच्छा थी कि वह पढ़ाई करेगा और बड़ा आदमी बनेगा।

रामु ने नीलू की इच्छाओं को समझा और उसकी मदद करने का निर्णय लिया। वह नीलू को बिना किसी शुल्क के अपनी शिक्षा में शामिल किया। रामु ने नीलू को न केवल विज्ञान, गणित, और विषयों का ज्ञान दिलाया, बल्कि उसे सच्चे मानवता का भी सिखाया। वह उसे सहानुभूति, सहयोग, और समझदारी की महत्वपूर्ण बातें सिखाते थे।

नीलू के साथ की गई शिक्षा के बाद, वह एक प्रतिष्ठित डॉक्टर बना, और अब वह अपने गाँव के गरीब और असहाय लोगों की मुफ्त मेडिकल सेवाएँ प्रदान कर रहा है।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि सच्ची शिक्षा व्यक्ति को केवल अकादमिक ज्ञान से ही नहीं लेकिन भावनाओं, मूल्यों, और मानवता की महत्वपूर्ण बातें सिखाने का भी कार्य करती है। रामु जैसे उदार और गुरुकुल के शिक्षक हमारे समाज के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और समाज को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

2) एक छोटा लड़का की कहानी

यह कहानी एक छोटे से गांव के एक छोटे से लड़के की है, जिसका नाम आर्यन था। आर्यन गरीब परिवार से था, लेकिन उसमें बड़ी उम्मीद और जीवन के प्रति बड़ा सपना था।

आर्यन की पढ़ाई के लिए ज्यादा संभावना नहीं थी, क्योंकि उसके पास पढ़ाई के लिए पुस्तकें या स्कूल जाने के लिए पैसे नहीं थे। लेकिन वह किसी भी चुनौती के सामना करने के लिए तैयार था।

गांव में एक बड़ा सांप्रदायिक पुस्तकालय था, जिसमें गांव के बच्चे पढ़ाई कर सकते थे। आर्यन ने वहाँ काम करने का निर्णय लिया और पुस्तकालय के मालिक से प्रशासन काम करने की इजाज़त मांगी।

पुस्तकालय के मालिक ने उसे मौका दिया, लेकिन आर्यन को हर दिन सुबह बहुत जल्दी उठना पड़ता था, ताकि वह पुस्तकालय को साफ़ करके तैयार कर सके।

आर्यन का समय पुस्तकालय में काम करने में ही गुजरता और उसने पुस्तकें पढ़ना शुरू किया। जब वह खाली समय में पढ़ लेता, तो पुस्तकालय के मालिक ने उसकी मदद की और उसे और भी अधिक पढ़ाई के साधनों का प्रयोग करने की इजाज़त दी।

धीरे-धीरे, आर्यन ने बड़े ही उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए और वह एक उच्च शिक्षा संस्थान में आदमित हो गए। उसकी मेहनत और आत्मविश्वास ने उसे उसके सपनों की प्राप्ति में सफल बनाया।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि किसी भी समस्या या चुनौती के सामने हार नहीं मानना चाहिए। आर्यन की तरह हमें अपने सपनों के लिए मेहनत करना और संघर्ष करना चाहिए, चाहे हमारे पास सामग्री कम हो या न हो। उसकी मेहनत और आत्मविश्वास ने उसे उसके लक्ष्यों तक पहुँचाया और हमें यह सिखाता है कि मेहनत और संघर्ष से हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं।

3) बलिदान की कहानी

बलिदान की कहानी विभिन्न रूपों में कई कहानियों और इतिहासिक घटनाओं के साथ जुड़ी हो सकती है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन का बलिदान देता है या अपनी स्वार्थ के बजाय दूसरों की सेवा के लिए अपना समय, श्रम, या जीवन अर्पित करता है। यहां एक प्रसिद्ध बलिदान की कहानी है:

माहात्मा गांधी की कहानी: महात्मा गांधी, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन को अपने देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान कर दिया।

गांधीजी का संघर्ष शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक युद्ध के माध्यम से था। उन्होंने अनैतिक अंग्रेजी शासन के खिलाफ सत्याग्रह का संग्राम किया और लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवश्यक थोकरें नहीं मारने के लिए प्रोत्साहित किया।

गांधीजी ने आश्रमों में सादगी के साथ जीवन व्यतीत किया और बच्चों, युवाओं, और वृद्धों को शिक्षा दी। उन्होंने आराम हार्ष और खुद से त्याग किया और अपने आरामगाह के अनुसार नहीं जीवन व्यतीत किया।

महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक बार अपने जीवन का बलिदान किया, आंदोलनों में भाग लिया, और अपनी स्वतंत्रता के लिए जेलों में कई बार बंद हुए। उन्होंने अपने जीवन के आख़िरी पलों में भी अख़ेड़े का समर्थन किया और अपने आदर्शों के लिए बलिदान दिया।

गांधीजी का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए महत्वपूर्ण था और उनकी अहिंसा, सत्याग्रह, और सादगी के आदर्शों ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में मदद की। उनका बलिदान आज भी दुनिया भर में याद किया जाता है और उन्हें “राष्ट्रपिता” के रूप में सम्मानित किया जाता है।

4) दादाजी की मेज की कहानी

यह कहानी एक छोटे से गांव में रहने वाले दादाजी की है, जो अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं।

एक दिन, दादाजी अपने छोटे पोते के साथ अपने खेत में काम कर रहे थे। वे खेत में अपने हाथों से फसल की देखभाल कर रहे थे। छोटे पोते ने देखा कि दादाजी के पास एक छोटी सी मेज है, जिसमें सिर्फ एक चम्मच चावल था और वे उसे बड़े गौर से देख रहे थे।

पोता ने अपने दादाजी से पूछा, “दादाजी, आपके पास इतनी छोटी सी मेज है, लेकिन आप इसकी इतनी धूरता से देख रहे हैं। क्या आप मुझे इसका मतलब बता सकते हैं?”

दादाजी मुस्कराएं और अपने पोते के पास बैठे, तब वह इस कहानी को सुनाते हैं:

“बिलकुल, मेरे पुत्र, यह मेज मेरे जीवन का महत्वपूर्ण सबक है। देखो, इस मेज पर सिर्फ एक चम्मच चावल है, लेकिन इसका मतलब है कि हमें हमारे पास जो कुछ भी है, उसका महत्व समझना चाहिए।

जीवन में हमें अकेली महत्वपूर्ण चीजों की ही चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि हमें वो सब कुछ भी महत्वपूर्ण समझना चाहिए जो हमारे पास है। हमें अपने संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए और उनका आदर करना चाहिए।

इस छोटी सी मेज से हमें यह सिखना चाहिए कि सब कुछ हमारे पास हो, छोटा या बड़ा, वो हमारे जीवन का हिस्सा है और हमें उसका मूल्यवान होना चाहिए।”

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अपने जीवन में धन्य होना चाहिए और हमें अपने पास जो कुछ भी है, उसका सही तरीके से मूल्यांकन करना चाहिए। छोटी चीजों का महत्व समझने से हम खुशी और संतोष का अहसास कर सकते हैं, और हमारे जीवन को साझा करने की कला को सीख सकते हैं।

5) धोखेबाज़ दोस्त की कहानी

यह कहानी एक छोटे से गांव के दो दोस्तों की है, जिनके नाम राज और कृष्ण थे। वे बचपन से ही अच्छे दोस्त थे और हमेशा एक साथ खेलते और पढ़ते रहते थे।

जब वे बड़े हो गए, तो उनके बीच में आये दोस्ती का रिश्ता कुछ बदल गया। राज बहुत आमिर था और उसके पास बड़ा घर और महंगी गाड़ियाँ थीं, जबकि कृष्ण और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत नहीं थी।

राज ने अपनी धनवानी स्थिति का फायदा उठाने का निर्णय लिया और वह कृष्ण से बदल गया। वह अब कृष्ण के साथ नहीं खेलता और उसके साथ ज़रा भी वक़्त नहीं बिताता।

कृष्ण बहुत ही दुखी हुआ क्योंकि उसका सच्चा दोस्त अब उससे दूर था। लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं किया और राज के पास गया, उसके दोस्ती के लिए विनती की।

राज ने धोखे से बदले के रूप में कृष्ण को एक छोटी सी प्रतिस्था दी और उसे कहा, “अगर तुम इसे तीसरे दिन तक बिना रुके इसे छोड़ देते हो, तो मैं तुम्हारे साथ दोस्ती करूंगा।”

कृष्ण ने प्रतिस्था को ले लिया और तीन दिनों तक बिना रुके उसे अपने कंधों पर रखा रखा और फिर राज के सामने पहुँचा।

राज बहुत ही चौंका और गिल्टी महसूस करने लगा क्योंकि उसने कृष्ण को धोखा दिया था। वह अपने खुद के गलत कार्य की पछतावा करता हुआ, ने कृष्ण के साथ दोस्ती की प्रार्थना की।

कृष्ण, जो हमेशा सच्चे मित्रता को महत्व देता था, उसकी प्रार्थना को स्वीकार कर लिया और वे फिर से दोस्त बन गए। इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि धन और सामर्थ्य की बजाय, सच्ची दोस्ती और विश्वास को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

6) कौन बड़ा मूर्ख की कहानी

“कौन बड़ा मूर्ख?” एक प्रसिद्ध पंचतंत्र की कहानी है, जिसमें एक हाथी, एक बंदर, और एक खरगोश के बीच में होने वाले हास्यास्पद घटनाक्रम का वर्णन किया गया है।

कहानी का आरंभ होता है जब खरगोश एक गाँव में रहता था और वह अपनी बुद्धिमानी की चर्चा करता था। एक दिन उसने फैसला किया कि वह अपने दोस्तों के साथ एक यात्रा करेगा और वे एक साथ गधे की दिशा में जाएंगे।

खरगोश और उसके दोस्त खरगोश के साथ गधे की ओर बढ़ते हैं, लेकिन गाड़ा उनमें चल नहीं पा रहा था। हाथी और बंदर क्या करें, वे खरगोश से सलाह लेने लगे।

खरगोश ने उन्हें बताया कि वे गाड़े के पिछले हिस्से को उधारी सकते हैं, और इससे गाड़ा आराम से आगे बढ़ सकता है।

हाथी और बंदर खरगोश की सलाह मान ली और गाड़े के पिछले हिस्से को उधार लिया। फिर वे सभी बड़े ही गर्व से गाड़े के साथ जा रहे थे, ताकि वे दिखा सकें कि कौन बड़ा मूर्ख है।

कहानी का मोरल है कि समस्याओं का समाधान बुद्धि से होता है, और उसके लिए आपको ज्ञान का अच्छा उपयोग करना चाहिए, न कि अपनी ताक़त का दिखावा करने की कोशिश करनी चाहिए।

7) खाली पेट की कहानी

“खाली पेट की कहानी” एक प्रेरणादायक कहानी है, जो हमें यह सिखाती है कि गरीबी और भूख का महत्व समझना चाहिए और हमें दूसरों की मदद करना चाहिए जब वे जरूरतमंद होते हैं।

कहानी एक गाँव में होती है, जहाँं एक गरीब और भूखा शेर बसे थे। वह दिन-रात अपने पेट की भूख से लड़ते थे और अकेले रहते थे क्योंकि उनके पास कोई दोस्त नहीं था।

एक दिन, शेर ने एक गाँव का दरिया पार करने का निश्चय किया और उसके पैर की ओर बढ़ता दिया। वह दरिया पार करने के लिए बहुत मेहनत करता रहा और अंत में उसे पार कर लिया, लेकिन उसकी ताक़त और उसका स्वास्थ्य दरिया पार करने के बाद कमजोर हो गए।

वह एक बड़े खूबसूरत और शांत बाग के पास पहुँचा जो एक धनी राजा के मालिक थे। बाग में देखकर उसने देखा कि पेड़ों पर बहुत सारा फल है, लेकिन वे सब बुरे तरीके से दिखते हैं।

शेर ने एक पेड़ के नीचे बैठकर अपने हाथों से एक फल तोड़ा और देखा कि फल के अंदर सोने की दिशा में एक सोने का टुकड़ा छिपा हुआ था। शेर ने खुशी-खुशी सोने का टुकड़ा निकाल लिया और खाला।

इसके बाद, शेर ने बाग के पेड़ों के सभी फलों को छेड़ा और उन्हें देखकर वह खुशी-खुशी उनके अंदर छिपे सोने के टुकड़ों को निकालकर खा लिया।

राजा ने खुद बाग में जाकर देखा कि उसके बाग के सभी फल खत्म हो गए हैं, और वह बहुत ही चौंका। फिर वह शेर के पास गया और उसे बहुत सारा सोना दिया ताक़ि वह वहीं से चला जाए।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि गरीबी और भूख का महत्व समझना चाहिए और हमें जब किसी की मदद कर सकते हैं, तो हमें वह करना चाहिए। शेर ने अपने दुखी स्थिति के बावजूद दूसरों की मदद की, और उसका आचरण हमें सच्चे दिल से दूसरों की मदद करने के महत्व को सिखाता है।

8) अनमोल पत्थर की कहानी

यह कहानी एक गाँव के एक गरीब लड़के के बारे में है जिसका नाम अर्जुन था। अर्जुन का सपना था कि वह अपने गरीब परिवार की मदद करें और उन्हें बेहतर जीवन दें।

एक दिन, अर्जुन ने अपने खेत में कुछ खुदाई करते समय एक बड़ा सा पत्थर खुदाई में देखा। वह पत्थर अद्वितीय दिखता था और अर्जुन ने उसे बाहर निकालने का निर्णय किया।

अर्जुन ने पत्थर को अपने घर ले जाया और वह देखता रहा कि इसका मूल्य क्या है। वह सोचता था कि यह पत्थर उसके और उसके परिवार के जीवन को बेहतर बना सकता है।

थोड़े दिनों बाद, एक यात्री अर्जुन के घर पहुँचा और उसने पत्थर को देखा। यात्री ने पत्थर का मूल्य जानकर अर्जुन को बताया कि यह पत्थर किसी बड़े राजा के लिए बेहद मूल्यवान है और वह इसे खरीदना चाहेगा।

अर्जुन ने पत्थर को बेच दिया और उसके पैसे से अपने परिवार की सुख-शांति की शुरुआत की।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि कभी-कभी हमारे पास समस्याओं का समाधान या मौका हो सकता है, लेकिन हमें उनकी मूल्य को समझना चाहिए। आपके पास कुछ छोटा सा भी हो, वह आपके और दूसरों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

9) भगवान की योजना की कहानी

एक गाँव में एक आदमी था जिसका नाम राम था। वह बहुत ही ईमानदार और निर्भीक था। राम का सोना के साथ एक बड़ा खेत था, और वह यहाँ पर खेती करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।

एक बार, गाँव में अचानक एक तीव्र बाढ़ आई, जिससे राम के खेत में सारी पैदावार नष्ट हो गई। राम बहुत ही दुखी हुआ और चिंतित हो गया क्योंकि उसका परिवार अब बिना खाने के था।

राम ने सोचा कि यह कैसे हो सकता है, क्योंकि वह हमेशा ईमानदार और धार्मिक रहा है। वह अपने मन में भगवान की स्थान की तलाश करने लगा और एक दिन वह ध्यान में खोया हुआ था जब उसके सामने एक स्वयंरूप व्यक्ति आया।

भगवान ने राम से कहा, “राम, मैंने तुम्हें एक परीक्षा दी है, जिसमें तुम्हें अपनी ईमानदारी और आस्था की प्रमाणित करनी है।”

राम ने पूछा, “परीक्षा क्या है?”

भगवान ने कहा, “तुम्हें अपने खेत में सोना दिखाना होगा, और उसके बाद वह सोना आपके लिए वापस आएगा।”

राम ने जब अपने खेत में सोना दिखाया, तो वह सोना अचानक जीवित हो गया और वह उसके साथ घर आया।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में चुनौतियों का सामना करते समय हमें आस्था और धैर्य बनाए रखना चाहिए। भगवान की योजना हमारे लिए हमेशा सही होती है, और वह हमें सही मार्ग पर ले जाती है, चाहे हमारे लिए यह समझना मुश्किल हो या नहीं।

10) कुछ और मूल्यवान की कहानी

यह कहानी एक समय की है जब एक गरीब मछुआरा अपने नेट में मछलियाँ पकड़ता था। वह बहुत ईमानदार और मेहनती था, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर थी। वह हर दिन समुद्र के किनारे पर काम करता और अपने गरीब परिवार का पालन-पोषण करता।

एक दिन, जब वह समुद्र के किनारे पर काम कर रहा था, तो उसने एक खास मोती को अपने नेट में पकड़ा। यह मोती बहुत ही अद्वितीय और चमकीला था। मछुआरा ने उसे देखकर अपनी किस्मत के साथ खुश हो गया।

लेकिन जैसे ही उसने मोती को अपने हाथ में लिया, एक आदमी उसके पास आया और उसके साथ-साथ एक और मोती लेने की प्रार्थना की। मछुआरा को दोनों मोतियों को बेच देने का प्रस्ताव दिया गया, जिससे वह आर्थिक रूप से काफी सुखी हो जाता, और उसका परिवार भी आर्थिक रूप से सुखमय जीने लगता।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि मूल्यवान चीजों को हमें उचित तरीके से पहचानना चाहिए। धन कमाने का सही तरीका है, लेकिन हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि हम जब किसी को मदद कर सकते हैं, तो हमें यह करना चाहिए। मछुआरा ने दोनों मोतियों को देने से खुद को धन कमाने का मौका गंवाया, लेकिन उसने दूसरों की मदद की और खुद को आत्मसंतुष्टि का अहसास किया।

11) झील में नमक की कहानी

“झील में नमक की कहानी” एक प्रसिद्ध लोककथा है, जिसमें एक शिकारी की चालाकी और अच्छादन दिखाई जाती है। इस कहानी का मोरल यह है कि अकेले आदमी की चालाकी और विवेक उसे समस्याओं से बचा सकते हैं।

झील में नमक की कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में एक झील थी, जिसके पास एक शिकारी आने के लिए बहुत सारी पक्षियों का झुण्ड आता था। इस झील के पास एक पुरानी मंदिर भी था, जिसके पुजारी ने बड़ी ईमानदारी से व्रत रखा करते थे।

एक दिन, झील के पास जब एक झुण्ड पक्षी आया, तो एक शिकारी ने उनको देख लिया। वह जानता था कि पुराने मंदिर के पुजारी के पास झील में जाने के लिए एक सिरा होता है, जिसकी मदद से वह पक्षियों को आसानी से पकड़ सकता है।

शिकारी ने झुण्ड का पीछा किया और जब झुण्ड झील के किनारे पहुँचा, तो वह देखा कि झील का पानी कुछ ही गहरा था और पक्षियों को पकड़ने के लिए उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ेगी।

शिकारी ने एक चालाकी की सोच बनाई। वह झुण्ड के पास गया और उनको धीरे-धीरे झील के किनारे की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने लगा।

झुण्ड के अधिकांश पक्षियों ने डरकर झील की ओर बढ़ना बंद कर दिया, लेकिन कुछ पक्षियाँ अभी भी पूरी कोशिश से झील की ओर बढ़ रही थी।

इसके बाद, झुण्ड के अधिकांश पक्षियाँ वापस मुड़ गए और शिकारी को उन्हें पकड़ने में सहायता करनी पड़ी।

शिकारी ने जिस पक्षी को पकड़ा, वह देखा कि वह पक्षी बहुत ही खुशी-खुशी था, और उसने उसके पास एक छोटा सा पत्थर दिया, जिसमें से नमक की बूँद गिरी थी।

शिकारी ने समझा कि यह नमक की बूँद उसके लिए कितनी मूल्यवान है, क्योंकि वह उसके साथ सबकुछ चलने वाला था।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि चालाकी और विवेक एक व्यक्ति को समस्याओं से बचा सकते हैं। शिकारी ने झुण्ड को विवेकन करने की कोशिश की और उसकी चालाकी से वह अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें आपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सही समय और सही तरीके से काम करना चाहिए।

12) ऋषि की शक्ति नैतिक की कहानिया

“ऋषि की शक्ति नैतिक कहानियाँ” कई भाषाओं, परंपराओं, और धर्मों के अनुसार आती हैं, और यह आध्यात्मिक और नैतिक सिखने के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। निम्नलिखित एक कहानी एक ऋषि की शक्ति और नैतिकता को दर्शाती है:

ऋषि की शक्ति नैतिक कहानी:

एक बार की बात है, एक प्रमुख गाँव में एक ऋषि नामक नारायण बाबा रहते थे। वह गरीबी में रहकर भी बहुत ही सान्त और धार्मिक थे।

एक दिन, गाँव में एक समस्या आई। एक आदमी ने एक बड़ी हीरा चोरी किया था और सभी गाँववाले उसके पीछे पड़ गए थे। लोग उस आदमी को पकड़ने के लिए बहुत उत्सुक थे, लेकिन वह अपने जगह छुप गया था।

गाँववाले ने ऋषि नारायण बाबा के पास आकर उनसे सहायता मांगी। ऋषि ने सभी को शांति से बैठने के लिए कहा और उनसे आग्रह किया कि वे अपनी क्रोध को नियंत्रित करें।

ऋषि ने उन्हें बताया कि वे चोर को पकड़ने के लिए क्रोध की जगह धैर्य और न्याय का सहारा लें। वह बताया कि धर्म और नैतिकता का पालन करना ही सच्चा ताकद़ है।

ऋषि के संदेश के बाद, लोग अपने क्रोध को नियंत्रित किया और चोरी केस को धीरे-धीरे समझने लगे। उन्होंने सबूतों की गहराईयों में जाकर धर्म और न्याय की पालन की और वे अब चोरी करने वाले की पकड़ कर सके।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि धर्म, न्याय, और नैतिकता की शक्ति हमें हर समस्या का समाधान ढूंढने में मदद कर सकती है। ऋषि ने लोगों को सिखाया कि क्रोध की जगह समस्या को न्यायपूर्ण रूप से हल करने के लिए सही मार्ग का चयन करना चाहिए, जिससे समृद्धि और शांति हो सके।

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यह कहानी हमें क्या सिखाती है?

यह कहानी हमें कई महत्वपूर्ण सिख देती है:

  1. न्याय और नैतिकता का महत्व: कहानी में ऋषि नारायण बाबा ने न्याय और नैतिकता के महत्व को बड़े दिल से दर्शाया है। वह बताते हैं कि किसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए हमें अपने क्रोध की जगह धर्मपरायणता, न्याय, और नैतिकता का सहारा लेना चाहिए।
  2. सहमति और सामंजस्य: ऋषि ने लोगों को समस्या को समझने के लिए विचार करने की और सहमति और सामंजस्य की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई है। वे समस्या को हल करने के लिए समृद्धि के साथ सहमति और सामंजस्य की ओर बढ़ने लगते हैं।
  3. आध्यात्मिक गुरु का महत्व: ऋषि नारायण बाबा की सलाह और मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे लोगों को धार्मिक और नैतिक मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
  4. सबका साथ और सहयोग: लोगों को एक साथ काम करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे उन्होंने समस्या को हल करने के लिए सहयोग और टीम काम की महत्वपूर्णता समझी।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि न्याय, नैतिकता, और धार्मिकता के मार्ग पर चलने से हम समस्याओं का समाधान ढूंढ सकते हैं और समृद्धि की ओर बढ़ सकते हैं।

नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ से जुड़े सवाल जवाब

  1. सबसे अच्छी नैतिक कहानी कौन सी है?

    “सबसे अच्छी नैतिक कहानी” का परिणाम व्यक्तिगत पसंदों और मूल्यों पर निर्भर करता है। नैतिक कहानियाँ विभिन्न विषयों और मूल्यों को उजागर करने के लिए होती हैं, और यह व्यक्ति के व्यक्तिगत रूप में क्या महत्व देता है, इस पर निर्भर करता है।

  2. इस कहानी से हमने क्या सिखा?

    यह कहानी हमें कई महत्वपूर्ण नैतिक सिख देती है-
    न्यायपूर्णता और नैतिकता, सहमति और समृद्धि, सामाजिक न्याय, न्याय और सत्याग्रह और साहस और संघर्ष

  3. बच्चों के लिए सबसे अच्छी नैतिक कहानी कौन सी है?

    बच्चों के लिए सबसे अच्छी नैतिक कहानियों का चयन उनकी उम्र, समझदारी, और रुचियों के आधार पर किया जा सकता है। यहां कुछ प्रसिद्ध बच्चों के लिए नैतिक कहानियाँ हैं, जो उन्हें मोरल मूल्यों को सिखाने में मदद कर सकती हैं-
    चूहे और बिल्ली की कहानी
    आलस्यपूर्ण बिल्ली की कहानी
    सोने का हाथी
    बंदर और कौआ
    चालाक लोमड़ी
    चालाक बंदर

  4. बच्चों को नैतिक शिक्षा कैसे दें?

    बच्चों को नैतिक शिक्षा देने के लिए निम्नलिखित तरीके अच्छे से काम कर सकते हैं-
    सही आदर्श प्रदर्शन, कहानियों का उपयोग, खुद की उच्च मानक प्राप्त करें, संवाद करें, समर्पण का उदाहरण

  5. नैतिक शिक्षा में हम क्या सीखते हैं?

    सभी का आदर करना, हिंसा न करना, कभी झूठ न बोलना, सभी से प्रेम करना, लोगों की सहायता करना आदि कार्य नैतिक शिक्षा कहलाती है। 

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