श्री अन्नपूर्णा चालीसा | Shri Annapurna Chalisa | PDF Download

श्री अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करने से माँ अन्नपूर्णा की असीम कृपा प्राप्त होती है ऐसे सभी जातक जो मां अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करना चाहते हैं जिससे कि माता की विशेष कृपा बनी रहती है और आपको अन्न संबंधी किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।

माँ अन्नपूर्णा अपने भक्तों को धैर्य साहस और ऊर्जावान बनती है। सभी व्यक्ति को माँ अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ मन से करना चाहिए। जिससे कि उसे किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं माँ पूरा करती है।

नीचे हम आपको श्री Shri Annapurna Chalisa का पाठ हिंदी में और अंग्रेजी भाषा और गुजराती में उपलब्ध करवा रहे हैं जिसे आप प्रेम रूपी पढ़िए और माँ का असीम कृपा प्राप्त करें।

Shri Annapurna Chalisa Mp3 Audio

श्री अन्नपूर्णा चालीसा हिंदी में (Shri Annapurna Chalisa in Hindi)

माँ अन्नपूर्णा चालीसा

श्री माँ अन्नपूर्णा चालीसा
॥ दोहा ॥
विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय ।
अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय ।
॥ चौपाई ॥
नित्य आनंद करिणी माता,
वर अरु अभय भाव प्रख्याता ॥1॥

जय ! सौंदर्य सिंधु जग जननी,
अखिल पाप हर भव-भय-हरनी ॥2॥

श्वेत बदन पर श्वेत बसन पुनि,
संतन तुव पद सेवत ऋषिमुनि ॥3॥

काशी पुराधीश्वरी माता,
माहेश्वरी सकल जग त्राता ॥4॥

वृषभारुढ़ नाम रुद्राणी,
विश्व विहारिणि जय ! कल्याणी ॥5॥

पतिदेवता सुतीत शिरोमणि,
पदवी प्राप्त कीन्ह गिरी नंदिनि ॥6॥

पति विछोह दुःख सहि नहिं पावा,
योग अग्नि तब बदन जरावा ॥7॥

देह तजत शिव चरण सनेहू,
राखेहु जात हिमगिरि गेहू ॥8॥

प्रकटी गिरिजा नाम धरायो,
अति आनंद भवन मँह छायो ॥9॥

नारद ने तब तोहिं भरमायहु,
ब्याह करन हित पाठ पढ़ायहु ॥ 10 ॥

ब्रहमा वरुण कुबेर गनाये,
देवराज आदिक कहि गाये ॥11॥

सब देवन को सुजस बखानी,
मति पलटन की मन मँह ठानी ॥12॥

अचल रहीं तुम प्रण पर धन्या,
कीहनी सिद्ध हिमाचल कन्या ॥13॥

निज कौ तब नारद घबराये,
तब प्रण पूरण मंत्र पढ़ाये ॥14॥

करन हेतु तप तोहिं उपदेशेउ,
संत बचन तुम सत्य परेखेहु ॥15॥

गगनगिरा सुनि टरी न टारे,
ब्रहां तब तुव पास पधारे ॥16॥

कहेउ पुत्रि वर माँगु अनूपा,
देहुँ आज तुव मति अनुरुपा ॥17॥

तुम तप कीन्ह अलौकिक भारी,
कष्ट उठायहु अति सुकुमारी ॥18॥

अब संदेह छाँड़ि कछु मोसों,
है सौगंध नहीं छल तोसों ॥19॥

करत वेद विद ब्रहमा जानहु,
वचन मोर यह सांचा मानहु ॥ 20 ॥

तजि संकोच कहहु निज इच्छा,
देहौं मैं मनमानी भिक्षा ॥21॥

सुनि ब्रहमा की मधुरी बानी,
मुख सों कछु मुसुकाय भवानी ॥22॥

बोली तुम का कहहु विधाता,
तुम तो जगके स्रष्टाधाता ॥23॥

मम कामना गुप्त नहिं तोंसों,
कहवावा चाहहु का मोंसों ॥24॥

दक्ष यज्ञ महँ मरती बारा,
शंभुनाथ पुनि होहिं हमारा ॥25॥

सो अब मिलहिं मोहिं मनभाये,
कहि तथास्तु विधि धाम सिधाये ॥26॥

तब गिरिजा शंकर तव भयऊ,
फल कामना संशयो गयऊ ॥27॥

चन्द्रकोटि रवि कोटि प्रकाशा,
तब आनन महँ करत निवासा ॥28॥

माला पुस्तक अंकुश सोहै,
कर मँह अपर पाश मन मोहै ॥29॥

अन्न्पूर्णे ! सदापूर्णे,
अज अनवघ अनंत पूर्णे ॥ 30 ॥

कृपा सागरी क्षेमंकरि माँ,
भव विभूति आनंद भरी माँ ॥31॥

कमल विलोचन विलसित भाले,
देवि कालिके चण्डि कराले ॥32॥

तुम कैलास मांहि है गिरिजा,
विलसी आनंद साथ सिंधुजा ॥33॥

स्वर्ग महालक्ष्मी कहलायी,
मर्त्य लोक लक्ष्मी पदपायी ॥34॥

विलसी सब मँह सर्व सरुपा,
सेवत तोहिं अमर पुर भूपा ॥35॥

जो पढ़िहहिं यह तव चालीसा,
फल पाइंहहि शुभ साखी ईसा ॥36॥

प्रात समय जो जन मन लायो,
पढ़िहहिं भक्ति सुरुचि अघिकायो ॥37॥

स्त्री कलत्र पति मित्र पुत्र युत,
परमैश्रवर्य लाभ लहि अद्भुत ॥38॥

राज विमुख को राज दिवावै,
जस तेरो जन सुजस बढ़ावै ॥39॥

पाठ महा मुद मंगल दाता,
भक्त मनोवांछित निधि पाता ॥ 40 ॥

॥ दोहा ॥
जो यह चालीसा सुभग,
पढ़ि नावैंगे माथ ।
तिनके कारज सिद्ध सब,
साखी काशी नाथ ॥

▼▼श्री अन्नपूर्णा चालीसा अंग्रेजी में पढ़े▼▼

Rate this post
1
2
Previous articleश्री लक्ष्मी चालीसा | Maa Laxmi Chalisa | Shree Gayatri Chalisa Pdf
Next articleश्री आदिनाथ चालीसा | Shri Aadinath Chalisa | PDF Download
हेलो दोस्तों! में Mayur Arya [hindineer.com] का Author & Founder हूँ। में Computer Science (C.s) से ग्रेजुएट हूँ। मुझे latest Topic (हिन्दी मे) के बारे में जानकारी देना अच्छा लगता है। और में Blogging क्षेत्र में वर्ष 2018 से हूँ। इस ब्लॉग के माध्यम से आप सभी का ज्ञान का स्तर को बढाना यही मेरा उद्देश्य है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here